नौकरी का झांसा देकर ठगने वालों से कैसे बचें

नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की खबरें आए दिनों अखबारों में छाई रहती हैं। कुछ चालबाज लोग अच्छी नौकरी का झांसा देकर युवाओं को फंसा लेते हैं। इससे युवाओं की जेब को चपत लगने के साथ - साथ उनके भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो जाता है। ऐसे चालबाजों से कैसे बचें , बता रहे हैं अशोक सिंह ...

देश के अलग - अलग हिस्सों में बेरोजगार युवाओं को ठगे जाने के यह किस्से ये बताने के लिए काफी हैं कि नौकरी के नाम पर जालसाजी और ठगी का जाल किस कदर पसरा है। नौकरी दिलाने की आस देकर मोटी रकम ऐंठने के मामले रोजाना देश में कहीं - न - कहीं दर्ज किए जाते हैं। ऐसे झांसे का शिकार होकर युवा घर की जमा - पूंजी से हाथ तो धो ही बैठते हैं , साथ में जालसाजी का शिकार होने का अहसास भी सालोंसाल तक टीस देता रहता है। मामले दर्ज होते हैं। ठग पकड़े भी जाते हैं लेकिन खोई रकम अमूमन नहीं मिल पाती। कुछ साल सलाखों के पीछे बिताने के बाद ऐसे ठग दोबारा अपने नए शिकारों की तलाश में निकल पड़ते हैं।

सवाल यह है कि मीडिया में ऐसे मामलों के बार - बार उछलने के बावजूद बेरोजगार युवा ऐसे लालच में कैसे फंसते हैं ? चलिए जानते हैं , युवाओं के फंसने की वजह बननेवाले बहानों और उनसे बचने के उपायों और सावधानियों के बारे में :

कुछ मामले
- पूर्वी दिल्ली से मार्च में पुलिस में नौकरी दिलाने के नाम पर एक शख्स को पकड़ा गया , जो खुद को डीएसपी कहता था। उसने जिसने हिमाचल और पंजाब में बड़ी संख्या में युवाओं को काफी मोटा चूना लगाया था।
- नई दिल्ली में मई में सरकारी नौकरियां दिलाने का झांसा देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये लोग नरेगा और राष्ट्रीय ग्रामीण आवाम सूचना संस्थान के नाम से सरकारी से मिलती - जुलती वेबसाइट्स के जरिए लोगों से धोखाधड़ी कर रहे थे।
- मई में ही जयपुर में कई युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर 28 लाख रुपये की चपत लगाने का केस दर्ज किया गया।
- हैदराबाद में सिटी फैसिलिटी नामक कंपनी द्वारा ऑनलाइन जॉब दिलाने के नाम पर सैकड़ों बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये ठगने के मामले का जुलाई में खुलासा हुआ।
- इसके अगले महीने रेलवे में जॉब दिलाने का सब्जबाग दिखाकर बेरोजगार युवकों से लाखों रुपये झटकने का मामला उजागर हुआ।

फंसाने के तराके
- अखबारों में विज्ञापन देकर सरकारी नौकरियां दिलाने का दावा।
- एसएमएस के जरिए इस तरह के ऑफर बार - बार भेजकर ललचाने की कोशिश।
- सरकारी से मिलती - जुलती नकली वेबसाइट्स के सहारे फंसाना।
- टेलिकॉलिंग के जरिए सरकारी नौकरियां दिलाने का सब्जबाग दिखाना।
- पब्लिक प्लेस में जानबूझकर युवाओं के आसपास मंडराते हुए ऐसी डील करने का नाटक कर उन्हें बातचीत के लिए उकसाना।
- प्लेसमेंट एजेंसियों से ऐसे युवाओं के पते हासिल कर नौकरियों के झूठे ऑफर भेजकर इंटरव्यू की कॉल करना।
-सोशल मीडिया में जॉब के मैसेज भेजना।
-किसी जान - पहचान वाले के ईमेल के जरिए ऐसे ऑफर भेजकर फंसाने की कोशिश करना।

ऐसे पहचानें असलियत
- मुलाकात या बातचीत के दौरान पहले ध्यान से ऑफर को समझने की कोशिश करें। एक - एक शब्द को धीरज के साथ सुनें। जैसे ही कुछ सर्विस चार्ज या कमिशन या किसी और नाम से पैसे देने की बात सामने आए तो फौरन सचेत हो जाएं। साफ शब्दों में पूछें कि किस बात के पैसे मांग रहे हैं ?
- अगर किसी प्लेसमेंट एजेंसी के नाम पर यह हो रहा है तो साफ कहें कि नौकरी मिलने के बाद जब सैलरी मिलेगी , उसके बाद ही आप कमिशन या तयशुदा फीस दे पाएंगे। उससे पहले अडवांस में पैसे देने का सवाल ही नहीं उठता। आप ज्यादा बहस न करें और उठकर चल दें। अब अगर सही ऑफर होगा तो कोई कारण नहीं है कि वह आपकी पहली सैलरी तक इंतजार न करे।
- सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जा रहा है तो मानकर चलिए कि 99 फीसदी फ्रॉड मामला है , क्योंकि सरकारी विभागों के खाली पदों को भरने के लिए अखबारों में विज्ञापन देने से लेकर आवेदन मंगवाने और फिर चयन की पूरी प्रक्रिया का अच्छी तरह पालन किया जाता है। बिना किसी ऐसी प्रक्रिया के शॉर्ट - कट से नौकरी मिलने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
-अपनी तसल्ली के लिए आप संबंधित सरकारी विभाग से सीधे संपर्क कर जान लें कि दावों में कितनी सचाई है। फोन नंबर या पता विभागों की वेबसाइट्स से बड़ी आसानी से मिल जाता है।

कौन होते हैं संभावित टारगेट
- नौकरी की तलाश में जगह - जगह भटकते नजर आनेवाले बेरोजगार नौजवान
- प्लेसमेंट एजेंसियों में आने - जाने वाले और इनमें रोजगार के लिए रजिस्टर्ड युवा
- तमाम सोशल वेबसाइट्स पर अपनी पर्सनल डिटेल्स शेयर करने वाले लोग
- कम पढ़े - लिखे और स्कूली शिक्षा अधूरी छोड़ने वाले बेरोजगार
- प्राइवेट जॉब्स में काम करने वाले ऐसे लोग , जो सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे रहते हैं
- पढ़ी - लिखी हाउस वाइव्स , जिनकी करियर बनाने में गहरी दिलचस्पी हो
-शहरों में नए - नए आनेवाले ग्रामीण बैकग्राउंड के युवा

क्या करें , क्या न करें
- ऐसे फ्रॉड में फंसने की शुरुआत जॉब पाने के लिए बैकडोर एंट्री के लालच से ही होती है। किसी भी तरह अच्छी नौकरी जुगाड़ने की मानसिकता को चालबाज कैश कर लेते हैं , इसलिए शॉर्ट - कट की बजाय हमेशा अपनी क्वॉलिफिकेशन और क्षमता के अनुसार तय प्रक्रिया को अपनाते हुए जॉब पाने की कोशिश करनी चाहिए।
- अप्लाई करते वक्त कन्फ्यूजन की स्थिति में दलालों और बिचौलियों से मदद लेने की बजाय सीधे संबंधित विभागों के अधिकारियों से आधिकारिक जानकारियां हासिल करनी चाहिए।
- अपने बारे में ज्यादा जानकारियां किसी अजनबी को देने की आदत को बदल लेना ही समझदारी है। बाद में इन्हीं सूचनाओं का इस्तेमाल कर ठगा जाता है।
- किसी पर भी फौरन भरोसा कर लेना खतरे से खाली नहीं होता। जाने - अनजाने ऐसी गलती कर बैठना अक्सर महंगा सौदा साबित होता है।

कैसे जीतते हैं भरोसा
- छोटा - मोटा फेवर कर मेल - जोल बढ़ाने की कोशिश शुरू होती है और बाद में अपनापन दिखाते हुए अपने ' संपर्कों ' से बेरोजगारी की परेशानियों का हल करने की पेशकश की जाती है। इसमें महिलाएं और बुजुर्ग लोगों का भी सहारा लिया जाता है ताकि आसानी से शक न हो।
- मिलने के दौरान रेस्तरां और दूसरे छोटे - मोटे खर्चे अपनी जेब से किए जाते हैं। शुरुआती इन्वेस्टमेंट कर सामनेवाले को प्रभावित किया जाता है और सोशल वर्क का जामा पहना कर मदद करने की आड़ में मन मोहने की कोशिश की जाती है।
- रेलवे और बसों में लच्छेदार बातों के जरिए ऐसे दांव फेंके जाते हैं कि जरूरतमंद सामनेवाले को हमदर्द समझ बैठता है और आखिर में धोखा खा जाता है।

लालच कैसे - कैसे
- सबसे आसान तरीका है सरकारी नौकरी का ऑफर , जिसमें बताया जाता है कि वह शख्स चुटकियों में ऊंची पहुंच वाले जानकार के जरिए जॉब दिलवा सकता है। भरोसा दिलाने के लिए कुछ ऐसे लोगों से भी मिलवाया जाता है , जिनको वह शख्स कथित तौर पर जॉब दिलवा चुका है। ये सभी इसी गिरोह के सदस्य होते हैं। बाद में और भरोसा जीतने के लिए किसी प्राइवेट ऑफिस या होटल में तथाकथित बड़े अफसर से मिलवाने का नाटक भी किया जाता है। अमूमन यहीं पर अडवांस पेमेंट भी करने को कहा जाता है।
-पेमेंट फौरन करने के लिए यह मनोवैज्ञानिक दबाव भी डाला जाता है कि समय बहुत कम है और एक - दो दिनों में ही फैसला किया जाना है इसलिए फौरन अडवांस में पेमेंट करें , वरना मौका हाथ से निकल जाएगा। अमूमन लोग इस जाल में फंस जाते हैं और पेमेंट कर बैठते हैं।
- जानबूझकर ऐसे पदों और इतनी ज्यादा सैलरी का लालच दिया जाता है कि अचानक इनकार कर पाना आम आदमी के लिए काफी मुश्किल हो जाता है।
-इतना ही नहीं , कई मामलों में तो अपॉइंटमेंट लेटर तक दिखाया जाता है , जो वास्तव में नकली होता है। अब इसके बदले पैसा निकालना ज्यादा मुश्किल नहीं रह जाता। इसकी असलियत का तो काफी बाद में इस डिपार्टमेंट में जाने पर ही पता चल पता है लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

कड़वी सचाइयां
- पुलिस छानबीन में कई मामलों में पता चला है कि आईटी की बड़ी कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट के लोगों की मिलीभगत से बैकडोर एंट्री से भी जॉब्स दिए जाते हैं।
- मशहूर कंसल्टेंसी एजेंसी अर्न्स्ट ऐंड यंग की साल 2011 की एक रिपोर्ट के अनुसार एक मल्टिनैशनल आईटी कंपनी की इंडियन ब्रांच में पूरे एचआर डिपार्टमेंट को इस तरह का फ्रॉड करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया।
- कई मामलों में नामी कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट्स , जॉब कंसल्टेंट्स और ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स की मिलीभगत से ऐसे खेल खेले गए।
- बड़ी कंपनियों के एचआर अधिकारियों के रिश्तेदारों द्वारा भी ऐसी एजेंसियां / सर्टिफिकेशन इंस्टिट्यूट चलाने के मामले सामने आए , जिनमें उन कंपनियों में गारंटी से जॉब दिलाने का दावा किया गया था।
- एक इंजिनियरिंग कॉलेज के प्रफेसर के अनुसार इस तरह के फ्रॉड्स का एक प्रमुख कारण ऐसे प्राइवेट इंजिनियरिंग कॉलेज भी हैं , जो पूरे कोर्स के दौरान ऐसा कुछ नहीं सिखाते जिससे स्टूडेंट्स को मार्केट में जॉब मिल सके। जाहिर है , जॉब की खातिर ऐसे युवा जालसाजों के हाथों में पड़ जाते है।
- ऐसे मामलों में असरदार और सटीक कानून का न होना , मौजूदा कानूनों की खामियां और कानून का पालन करवाने वाली सरकारी एजेंसियों की सुस्त चाल भी ऐसे फ्रॉड्स को बढ़ाने में जाने - अनजाने मददगार साबित होती है।
- देश के कस्बों और छोटे शहरों में इस तरह के जॉब रैकेट्स आज भी खूब धड़ल्ले से चल रहे हैं और युवाओं को मोटा चूना लगा रहे हैं।

फांसने के नए - नए फॉर्म्युले
- हाल में देखने में आया कि एक गिरोह ने बड़ी संख्या में सिर्फ इंजिनियरों को बेहद चालाकी से यह कहकर फंसाया कि वे उनको इंजिनियरिंग कंसल्टेंसी का काम दिलवा सकते हैं , जिसमें कुल प्रॉजेक्ट लागत का 1 फीसदी तक उनको कंसल्टेंसी फीस के रूप में मिलेगा। इसके बदले में मोटी रकम इन ' कंसल्टेंट्स ' से अडवांस में उगाही कर वे चालबाज उड़न - छू हो गए।
-एक गिरोह ने सरकारी टीचर का अपॉइंटमेंट लेटर देकर गांव - देहात के सरकारी स्कूलों में जॉइनिंग तक करवा दी और लाखों रुपए सर्विस चार्ज के रूप में लेकर चंपत हो गए और बाद में जब सैलरी मिलने का दिन आया तो पता चला कि सब कुछ फर्जी है।
-मेट्रो में जॉब दिलाने के नाम पर लोग अक्सर इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं। कम पढ़े - लिखे लोग इस तरह के झांसे में जल्दी फंस जाते हैं और नासमझी में आसानी से ठगी का शिकार हो जाते हैं।
- आर्मी के नकली सिलेक्शन कैंप का आयोजन करके भी लोगों को बड़ी सरलता से ये अपने जाल में फंसा लेते हैं। भरोसा जमाने के लिए किसी मिलीभगत वाले या नकली आर्मी अफसर के साथ आर्मी ट्रेनिंग सेंटर के आसपास राउंड भी लगवा देते हैं।
- एयरपोर्ट और एयरलाइंस आदि में जॉब्स दिलाने के बहाने भी ऐसे गोरखधंधे का खुलासा हुआ है। इसमें भी 25 से 50 हजार रुपए तक अडवांस लिए जाते हैं और दिलचस्प बात यह भी है कि यहां वाकई जॉब भी दिलाया जाता है , लेकिन असलियत का पता तब चलता है जब छह महीने बाद निकाल दिया जाता है क्योंकि ये नियुक्तियां प्राइवेट एजेंसियों में होती हैं , जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर एयरपोर्ट में सिक्युरिटी , मेनटिनेंस या दूसरी तरह के काम मिलते हैं।
- सरकारी विभागों के क्लर्कों के साथ मिलकर ऐसी हेराफेरी करने के भी तमाम मामले सामने आए हैं।

विज्ञापनों की लुभावनी भाषा से सावधान रहें
- ऐसे क्लासिफाइड विज्ञापनों में बड़े - बड़े दावे किए जाते हैं - जैसे बड़ी मल्टिनैशनल कंपनी में बैकडोर एंट्री से कन्फर्म कोर आईटी टेक्निकल ट्रेनिंग के साथ जॉब , कम पढ़े - लिखे लोगों के लिए हाईटेक जॉब के मौके , अनुभव रहित लोगों को आकर्षक पे पैकेज सहित जॉब आदि।
- असल में ऐसे ज्यादातर विज्ञापन पूरी तरह से झूठे होते हैं और बेरोजगार युवाओं को फंसाने के लिए तैयार किए जाते हैं।
- ऐसे लोग कमिटमेंट अमाउंट , ट्रेनिंग फीस , कंसल्टेंट फीस , नॉन रिफंडेबल सिक्युरिटी डिपॉजिट आदि की आड़ में लाखों रुपये की उगाही की चाल चलते हैं।

विदेशों में जॉब्स दिलाने का सपना
- कबूतरबाजी के जरिए विदेश भेजने और जॉब दिलाने का धंधा दशकों से जारी है। ऐसे धोखेबाज पकडे़ भी जाते हैं लेकिन जल्द ही रिहा होकर कोई नया रास्ता निकाल कर भोले लोगों को लूटने का काम शुरू कर देते हैं। विदेश भेजने के गोरखधंधे में पासपोर्ट से लेकर बिना वीजा के विदेशों में गैरकानूनी तरीके से भेजने तक का गोलमाल होता है। लोग ऐसे मोह में पड़कर घर - बार तक दांव पर लगा देते हैं और बाद में पकडे़ जाने पर सजा भुगतने के अलावा पैसे भी गंवाते हैं। खास तौर से पंजाब और देश के दक्षिणी राज्यों में ऐसे तमाम मामले सामने आते रहते हैं। समझदारी तो यही है कि ऐसे लालच में नहीं पड़ा जाए क्योंकि आज नहीं तो कल , ऐसे ज्यादातर मामले उजागर होते ही हैं और तब करियर चौपट होने के साथ - साथ जेल जाने का ठप्पा भी लग जाता है। इसके बाद भविष्य के रास्ते भी हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं।

पुलिस शिकायत से बचते हैं शिकार
धोखाधड़ी के शिकार खासकर आईटी क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं में आमतौर पर यह ट्रेंड देखने को मिला है कि वे अपने साथ हुई जालसाजी की रिपोर्ट पुलिस में करने से कतराते हैं। ऐसा करने में उन्हें झिझक लगती है। इसके पीछे कई कारण हैं , जैसे कि ...
- ठगे जाने की बात को सार्वजनिक करने से बेइज्जती होने का डर।
-इस बारे में अपने अधिकारों से अनजान होना।
- यह आशंका कि पुलिस कंप्लेंट करने से आईटी कंपनियां उनके रेज्यूमे को ट्रैक कर उनके लिए जॉब्स में एंट्री के रास्ते बंद कर सकती हैं , जबकि यह कोरी गलतफहमी है।

कैसे पहचानें जॉब फ्रॉड्स के ऑफर
- कम काम , किसी प्रफेशनल डिग्री और अनुभव के बिना भी बेहद ऊंची सैलरी का ऑफर
- क्रेडिट कार्ड , बैंक अकाउंट्स और दूसरी पर्सनल डिटेल्स के बारे में जानने की कोशिश
- बिना किसी सिलेक्शन प्रोसेस या इंटरव्यू के जॉब लेटर देने की बात
- ऐसे ऑफर्स , जिसमें आपसे ऑनलाइन ट्रांसफर या कुरियर के जरिए पैसे देने को कहा जाए

ठगे जाने पर चुप न बैठें
- अगर आप इस तरह की चीटिंग / जालसाजी के शिकार हुए हैं तो चुप न बैठें। पुलिस और संबंधित सरकारी विभाग में शिकायत जरूर करें। साथ में जो भी सबूत हों , उनकी कॉपी भी अधिकारियों को उपलब्ध कराएं ताकि उनके पास भी ऐक्शन न लेने का बहाना न हो।
- ठगे गए दूसरे लोगों को अपने साथ जोड़कर ऐक्शन का दबाव बनाएं तो न सिर्फ आप अपने ठगे जाने का बदला ले सकते हैं , बल्कि दूसरे युवाओं को भी इनके चंगुल में फंसने से बचा सकते हैं।
- पुलिस की ओर से कार्रवाई में बहानेबाजी या टालमटोल किया जा रहा हो तो मीडिया से संपर्क करें ताकि मामला सरकार और उच्च अधिकारियों की नजर में आ जाए।

बचने के लिए क्या करें
- जो लोग आपको ऐसे ऑफर्स दे रहे हों , उनकी पहचान जानने के लिए आई - कार्ड या दूसरे रेजिडेंशल प्रूफ की कॉपी मांगें।
- हमेशा ऐसी कंपनियों में काम करने वाले लोगों के रेफरेंस हासिल करने और कंपनी के ऑफिस में जाकर अधिकारियों से मिलने की बात पर जोर दें।
- अपने सोर्सेज के जरिए कंपनी के बारे में जानकारियां हासिल करने की कोशिश करें।
- बिना आधिकारिक ईमेल और लेटरहेड के ऑपरेट करने वाली कंपनियों पर भरोसा न करें।
- अगर विदेशी कंपनियों से ऑफर का मामला हो तो संबंधित देश की एंबेसी से संपर्क कर असलियत जानने की कोशिश करें।
- शक होने पर वक्त रहते पुलिस से संपर्क कर छानबीन का अनुरोध करें।
साभार -
नवभारत टाइम्स | Oct 14, 2012, 10.27AM IST
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/16806402.cms

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