मोती घोटाला – भाग 7 : मोती नहीं पकड़े जाते विमानतल स्कैनरों में

सफेद मोतियों के काले कारोबार का एक स्याह पहलू और भी है। मोती कारोबार और उसकी तस्करी से जुड़े लोगों को पता है कि देश के किसी भी गोदी या हवाई अड्डे पर लगे स्कैनरों में यह काबिलियत नहीं है कि उनके 10 किलो वजन तक मोतियों से भरे बैग की जांच करने पर उनकी साफ तस्वीर दिखा दे। इस चूक का फायदा मोती के तस्कर उठा रहे हैं। यही कारण है कि मोती की तस्करी धड़ल्ले से चल रही है और उनकी रोकथाम भी नहीं हो पा रही है।

हैंड बैगेज में आते मोती
मोती होते भले ही ठोस हैं लेकिन चूंकि वे बनते चूने (कैल्शियम) से हैं, चूंकि वे प्रकृति से शीतल होते हैं, चूंकि वे धातु के नहीं हैं, इसलिए किसी भी स्कैनर में वे अलग से उभर कर नहीं दिखते हैं। इसके चलते बड़े ही आराम से तस्कर एक बार में 10 किलोग्राम तक माल भर कर केबिन बैगेज या हैंड बैगेज के रूप में अपने साथ ही ले आते हैं।

बता दें कि एक बार में केबिन लगेज के रूप में कोई भी व्यक्ति 7 किलोग्राम तक ही वजन अपने साथ ला सकता है। चूंकि मोती का वजन अधिक और आकार छोटा होता है, इसके कारण 10 किलोग्राम मोती भी छोटे से हैंड बैग में समा जाते हैं। किसी को यह पता नहीं चलता है कि एक छोटे से बैग में कितने मोती भरे हुए हैं।

होता तो यह भी है कि कुछ खास हवाई अड्डों पर मौजूद कस्टम्स अधिकारियों के साथ इन मोती तस्करों की सांठगांठ होती है। उनकी ड्यूटी के समय में ही ये तस्कर आते हैं। कस्टम्स जांच के दौरान ये अधिकारी तस्कर को चुपचाप बाहर तक छोड़ने का इंतजाम भी करवा देते हैं।

करोड़ों की मोती तस्करी
सूत्रों के मुताबिक डेढ़ लाख रुपए प्रति कैरेट का बसरा मोती या 5 हजार रुपए प्रति कैरेट का साऊथ सी मोती बैग में भर कर चोरी से विमान तलों के स्कैनरों को धोखा देते हुए भारत लाया जाता है।

पता चला है कि एक बार में कैरियर लगभग 2 करोड़ रुपए तक के मोती की तस्करी कर लेते हैं। पता चला है कि साऊथ सी मोतियों के बीच में में फ्रेश वॉटर मोती भी मिल कर लाए जाते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक प्रति सप्ताह 2 से 5 कैरियर भारत आते हैं। ये हेंड बैगेज के जरिए मोतियों की खेप भारत लाते हैं। इस तरह देखें तो साल भर में कम से कम 208 करोड़ और अधिकतम 520 करोड़ रुपए तक का माल तस्करी के जरिए भारत पहुंचता है। इस पर यदि सीमा शुल्क गिना जाए तो तैयार मोती पर लगने वाली 10 फीसदी की दर से 20.8 से 52 करोड़ रुपए सालाना का नुकसान देश की तिजोरी को हो रहा है।

कैरियरों का स्वर्ग हांगकांग
हैंड बेगैज के जरिए माल की तस्करी करने वाले कैरियरों का स्वर्ग हांगकांग का शहर कवलून है। इसमें नाथन रोड पर स्थिच तिम शा सुई नामक इलाका है। यहां पर एक ही दफ्तर है जो कि हैंड बैगेज के लिए मोतियों की खेप भेजने का काम करता है।

हर साल हांगकांग के शहर वंचाई में सितंबर माह में जेम एंड ज्वेलरी फेयर होता है। यहां पर साऊथ सी पर्ल्स का बड़ा कारोबार होता है। अन्य माल भी बिकता है लेकिन साऊथ सी मोतियों के मुकाबले कम ही। तीन दिनों की एस प्रदर्शनी के दौरान सैंकड़ों करोड़ के सौदे भारतीय कारोबारी करते हैं। वहां पर भारतीय कारोबारियों की इतनी घुसपैठ है कि वे जिसे चाहे प्रदर्शनी और नीलामी में घुसने दें, जिसे न चाहें – उस पर प्रतिबंध लगवा कर अंदर घुसने से रुकवा सकते हैं।

इस प्रदर्शनी के बाद तो लगभग 2 सप्ताह तक भारत में हैंड बैगेज में भर कर तस्करी के जरिए खूब मोती आते हैं। यदि कस्टम्स अधिकारी थोड़ी नजर पैनी करें और मुखबिरों का जाल सक्रिय कर दें तो सैंकड़ों करोड़ रुपए के मोती की तस्करी आराम से पकड़ लेंगे।

तस्करों की पसंदीदा विमान सेवा
पता चला है कि दो खास एयरलाईंस का इस्तेमाल मोतियों के तस्कर और कैरियर करना पसंद करते हैं। जेट एयरलाईंस और कैथी पैसीफिक एयरलाईंस का ही अधिकतर इस्तेमाल होता है।

कैरियरों के कोडवर्ड
एसएस            – साऊथ सी मोती
एपी              – अकोया मोती
बीपी या आरपी     – बसरा मोती
टीएसटी           – तिम शा सुई
पोटली            – हीरों की थैली
स्ट्रिंग्स           – मोती की माला


विवेक अग्रवाल, मुंबई
(यह समाचार हिंदी, मराठी, गुजराती के कई प्रसिद्ध समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुका है।)

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