मानसून सट्टे में बुरी तरह पिटा सट्टाबाजार

  • मानसून सट्टा होता है सबसे भरोसेमंद
  • मानसून सट्टे में नहीं होती फिक्सिंग
  • मानसून सट्टे पर 4 हजार करोड़ रुपए का नुकसान
  • मानसून सट्टे का कोई बुकि आज तक नहीं गिरफ्तार

विवेक अग्रवाल
मुंबई, 26 सितंबर 2015
देश के किसानों से लेकर अर्थशास्त्रियों तक में मानसून पूरा और सही समय पर न होने के कारण एक तरफ भारी चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ सट्टाबाजार का भी भट्टा बैठ गया है। इस काले कारोबार में सट्टा बुकियों को इस बार खासा नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले 20 सालों से संगठित रूप से बारिश का सट्टा मुंबई से खुल रहा है। इस सट्टे में हजारों करोड़ रुपए का खेला होता है और हमेशा बुकि ही फायदे में रहते आए हैं। यह बारिश का पहला मौसम है, जिसने बुकियों की जेब में भी सूखा पैदा कर दिया है।

बता दें कि बारिश का मौसम 1 जून से 30 सितंबर तक होता है। मुंबई में बारिश अमूमन जून में 300 से 400 मिमी, जुलाई में 600 से 700, अगस्त 600- 700 और सितंबर माह में 200 मिमी तक होती है। पूरे मौसम में 1,900 से 2,100 मिमी तक बारिश के होती है। बारिश पर सट्टा करने वाले बुकि कोलाबा मानसून विभाग के आंकड़ों पर भरोसा करते हैं। वहां हर दिन जितनी बारिश होती है, उसके आंकड़े मानसून विभाग की वेबसाईट पर देखे जाते हैं। उनके ही आधार पर वलण (लेन-देन) तय होता है।
एक बुकि के मुताबिक इस बार बुकियों को मौसम ने खासा नुकसान पहुंचाया है। किसानों के कोठार खाली रह गए तो सटोरियों की जेब भी सूखी ही रह गई। इसके ठीक उलट जिन पंटरों ने कम बारिश की चेतावनियों के मद्देनजर कम बारिश का सट्टा खेल लिया था, उन पंटरों ने खूब कमाई की है। यह बात और है कि बुकियों को जून में कुछ फायदा इसलिए हुआ क्योंकि बारिश अधिक हुई थी। बाकी महीनों में पंटरों ने खूब कमाई की।


इस नुकसान के बाद काफी सारे मानसून बुकियों ने तो सोचना शुरू कर दिया है कि अगले साल से वे मानसून पर सट्टा खोलेंगे ही नहीं। काफी सारे बुकियों ने तो मानसून की खस्ता हालत देख कर होने वाले नुकसान का आकलन पहले ही कर लिया था और अगस्त माह में ही बोरिया-बिस्तरा लपेट लिया था।

एक सूत्र के मुताबिक सट्टाबाजार को बारिश के इस मौसम में कुल नुकसान 4 चार हजार करोड़ का हुआ है।

जेडी नामक एक बुकि के मुताबिक पिछले 20 सालों में ऐसी खराब बारिश और सट्टेबाजार को उतने भारी नुकसान की झलक भी देखने को नहीं मिली है। ये ही एकमात्र जुआ है, जिसकी फिक्सिंग नहीं हो सकती है। इसका कोई सटीक पुर्वानुमान भी नहीं लगाया जा सकता है।

जेडी ने यह भी बताया कि आज तक मानसून सट्टा करने वाले बुकियों में से कोई भी पुलिस द्वारा पकड़ा नहीं जा सका है। इसका कारण यह है कि बुकि बेहद सावधानी तो बरतते ही हैं, वे गाड़ियों में घूमते हैं और सट्टा लगाते हैं।

इस बुकि के मुताबिक सुबह 8 से रात 8 तक बारिश का सट्टा चलता है। जब बारिश चालू रहती है तो बुकि भाव नहीं लेते हैं। बारिश के रुकने पर ही फिर से कामकाज शुरू हो जाता है। सट्टा बुकियों के लोग कारों में चारों तरफ घूमते रहते हैं और बारिश आने के बारे में अपने आकाओं को आगाह करते रहते हैं। इसके बाद तुरंत सभी तक ये सूचना पहुंच जाती है और बारिश पर सट्टा बंद हो जाता है।

सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में जिस तरह से बारिश शुरु हो गई है, बुकियों के चेहरे पर फिर भी रौनक नहीं आई है। इसका कारण यह है कि अभी भी सट्टाबाजार में यही माना जा रहा है कि कुल बारिश पर लगे सट्टे जितना पानी तो आसमानी ताकत अभी भी बरसाएगी, इसका भरोसा उन्हें नहीं है।

सट्टाबाजार का रेट कार्ड
जून
जुलाई
अगस्त
सितंबर
300 मिमी – 22 पैसे
400 मिमी – 26 पैसे
400 मिमी – 26 पैसे
200 मिमी – 55 पैसे
400 मिमी – 72 पैसे
500 मिमी – 65 पैसे
500 मिमी – 65 पैसे
300 मिमी – 1.35 रुपए
500 मिमी – 1.90 रुपए
600 मिमी – 1.25 रुपए
600 मिमी – 1.25 रुपए
400 मिमी – 6 रुपए
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700 मिमी – 2 रुपए
700 मिमी – 2 रुपए
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